दिव्यांगजन तक पहुंचे शासकीय योजनाओं का लाभ-श्रीमती भेंड़िया

-उच्च शिक्षा के लिए दिव्यांगजन को प्राथमिकता से लोन देने के निर्देश
-बालोद और दंतेवाड़ा की तर्ज पर हर जिले में स्वावलंबन केन्द्र खोलने की तैयारी
-मंत्री श्रीमती भेंड़िया ने छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के कार्यों की समीक्षा की
रायपुर। समाज कल्याण मंत्री और छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम की अध्यक्ष श्रीमती अनिला भेंड़िया ने आज रायपुर के माना कैम्प स्थित समाज कल्याण संचालनालय में निगम के जिला प्रबंधकों की समीक्षा बैठक ली और दिव्यांगजन के सशक्तिकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्राथमिकता से ऋण देने की पहल की जाए। उन्होंने सभी जिलों से बालोद और दंतेवाड़ा जिले में संचालित स्वावलंबन केन्द्र की तर्ज पर स्वावलंबन केन्द्र खोलने प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐेसे दिव्यांगजन जिन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उनका चिन्हांकन करें और सभी दिव्यांगजन तक शासकीय योजनाओं की पहुंच बनाएं। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के संचालक रमेश कुमार शर्मा और छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के महाप्रबंधक पंकज वर्मा भी मौजूद थे।
श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि गांवों में छोटे-छोटे व्यवसाय के लिए दिव्यांगजनों को लोन दें जिससे उनकी आजीविका चल सके और वह समय पर लोन की वापसी भी कर पाएं। उन्होंने लंबे समय से लोन नहीं जमा करने वाले दिव्यांगजन और उनके अभिभावकों का चिन्हांकन करने और सक्षम लोगों से लोन वसूली के निर्देश भी दिए। श्रीमती भेंड़िया ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर राज्य स्तरीय आयोजन की तैयारियों के बारे में भी चर्चा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने संचालनालय में बुजुर्गों, दिव्यांगजन और तृतीय लिंग समुदाय के लिए संचालित राज्य स्तरीय कॉल सेंटर भी देखा और वहां दिव्यांग महिलाओं को भी रोजगार देने कहा।
संचालक रमेश कुमार शर्मा ने जिला अधिकारियों से कहा कि राज्य स्तर पर सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिसमें सभी जिले इस माह के अंत तक लोन के संबंध में पूरी जानकारी दें। उन्होंने दिव्यांगजन के वास्तविक चिन्हांकन और ऋण जमा नहीं करने के वास्तविक कारणों की जांच करने के साथ उन्हें लोन की राशि जमा करने प्रोत्साहित करने के लिए कहा। श्री शर्मा ने कहा कि लोने देने के पहले हितग्राही की उपयोगिता और पूर्व लोन की स्थिति की जांच अवश्यक कर लें। उन्होंने बकाया लोन के ब्याज पर सब्सिडी और ऋण राशि पर ब्याज के पुनर्निधारण की भी जरूरत बतायी जिससे दिव्यांजन लोन राशि जमा करने प्रोत्साहित हों और अधिक से अधिक दिव्यांगजन योजनाओं का लाभ ले सकें। इस पर समाज कल्याण मंत्री ने प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने बताया कि दिव्यांगजन द्वारा मूलधन और ब्याज की राशि जमा करने पर ब्याज की 25 प्रतिशत राशि उत्थान सब्सिडी के रूप में दी जाती है। अब तक 398 लोगों को उत्थान सब्सिडी प्रदान की गई है।
उल्लेखनीय है कि निःशक्तजन को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ वित्त विकास निगम की स्थापना की गई है। निगम द्वारा दिव्यांगजन को ऋण देकर उन्हें आर्त्मनिर्भर बनाने में सहायता की जा रही है। दिव्यांगजन को लघु व्यवसाय के लिए 5 लाख रूपए और सेवा क्षेत्र के लिए 7.5 लाख रूपए तक लोन दिया जाता है। साथ ही कृषि क्रियाकलापों और वाहन क्रय करने के लिए लोन भी निगम द्वारा दिए जाते हैं। मानसिक मंदता, मस्तिष्क पक्षाघात तथा विचार भ्रम से ग्रस्त व्यक्तियों की तरफ से उनके अभिभावकों को स्वरोजगार के लिए 10 लाख रूपए तक ऋण दिया जाता है। स्वावलंबन योजना के तहत निगम के माध्यम से दिव्यांगजन को कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन के लिए राशि प्रदान करने का भी प्रावधान है।

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Author: mithlabra

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