ऋषिकेश से लाये फूलों से सजा बद्रीनाथ धाम

 

बद्रीनाथ । श्री बद्रीनाथ धाम को कपाट बंद होने से एक दिन पहले आज ऋषिकेश से लाये कई क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। बाबा बदरी विशाल के धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिये जाएंगे। श्री धाम के कपाट बंद होने से पहले मंदिर परिसर को श्री बद्री विशाल पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश द्वारा लाये गये पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया है। उत्तराखंड के चार धामों में से श्रीकेदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री धाम के कपाट पिछले माह शीतकाल के लिए बंद कर दिये गये थे।
श्री बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया पांच दिन पहले यानी 15 नवंबर से चल रही हे जिसके तहत पहले दिन श्री गणेशजी के कपाट बंद हुए और दूसरे दिन 16 नवंबर को श्री आदिकेदारेश्वर मंदिर को समाधि रूप देने से पहले चावल का भोग अर्पित कर कपाट बंद किये गये। कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तीसरे दिन यानी 17 नवंबर बृहस्पतिवार को खडग पुस्तक पूजन के बाद श्री बद्रीनाथ धाम में वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो गया और आज शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना तथा कढाई भोग चढ़ाकर मां लक्ष्मी का आव्हान किया गया। धाम के रावजी जी 19 नवंबर को स्त्री भेष धारण कर माता लक्ष्मी को श्री बद्रीनाथजी के समीप्य प्रतिष्ठित करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी होने से पहले श्रीउद्धवजी श्रीकुबेरजी मंदिर परिसर में आ जायेंगे।
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि माणा गांव के महिला मंडल द्वारा बुने ऊन के घृत कंबल को भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाकर 19 नवंबर सायं 3 बजकर 35 मिनट पर श्री ब्रदीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।
उन्होंने बताया कि 20 नवंबर प्रात: श्रीउद्धवजी एवं श्रीकुबेरजी की डोली एवं आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्री बद्रीनाथ धाम से श्रीयोग ध्यान बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी। श्रीउद्धव जी एवं श्री कुबेरजी शीतकाल में श्रीयोग बदरी पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे जबकि 20 नवंबर को पांडुकेश्वर से प्रस्थान कर 21 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्रीनृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी जहां शीतकालीन भगवान की पूजा अर्चना होगी।

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Author: mithlabra

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