आरक्षण के मुद्दे पर आदिवासियों ने भाजपा सांसद मंडावी को घेरा

कांकेर सांसद समझाते रहे और आदिवासी विरोध पर आमादा रहे

-भानुप्रतापपुर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी के लिए वोट मांगने गए भानुप्रतापपुर के एक गांव में
कांकेर। आदिवासियों के आरक्षण में कटौती के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार जिम्मेदार है या फिर मौजूदा कांग्रेस सरकार ? ये सवाल अनुत्तरित ही है, लेकिन यह मुद्दा फिलहाल भाजपा के गले की फांस बन गया है। भाजपाई जनप्रतिनिधियों को आदिवासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसा ही कांकेर के भाजपा सांसद मोहन मंडावी के साथ भी हुआ। श्री मंडावी भानुप्रतापपुर विधानसभा के उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगने एक गांव में पहुंचे थे, जहां उनका आदिवासियों ने घेराव कर दिया।
आदिवासियों के आरक्षण में कटौती के खिलाफ आदिवासी लंबे समय से उद्वेलित हैं। बस्तर संभाग के आदिवासी इसे लेकर चक्काजाम और कांग्रेस विधायकों के आवासों का घेराव भी कर चुके हैं। भानुप्रतापपुर के उप चुनाव में आरक्षण का मुद्दा कुछ ज्यादा ही तूल पकड़ चुका है। भाजपा के विधायकों और सांसद को आदिवासियों के प्रबल विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कांकेर के भाजपा सांसद मोहन मंडावी को भी भानुप्रतापपुर क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी के लिए वोट मांगने जाना भारी पड़ गया। हाथों में आदिवासी प्रतीक चिन्ह से युक्त झंडे लिए आदिवासी नारेबाजी करते हुए श्री मंडावी की कार के सामने डट गए। कार से उतरकर श्री मंडावी आदिवासियों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास करने लगे। श्री मंडावी ने कहा कि मैं भी आदिवासी हूं और मुझे भी समाज की चिंता है। भाजपा सरकार ने 32 प्रतिशत आरक्षण दिया था। वर्तमान कांग्रेस ने कोर्ट में मामले को उलझा दिया। मैं और मेरी पार्टी आरक्षण के लिए राज्य से लेकर दिल्ली तक में लड़ाई लड़ रहे हैं। यहां की कांग्रेस सरकार तो हमारी मोदी जी की सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को दिए गए 18 लाख मकानों के निर्माण के मसले को भी अटका रखा है। श्री मंडावी ने कहा कि भाजपा आप लोगों के साथ है। वहीं भीड़ में मौजूद महिलाएं और पुरुषों ने श्री मंडावी पर सवाल दागा कि जब हम आरक्षण के लिए सड़क पर उतरे थे तब आप कहां थे, समर्थन देने क्यों नहीं आए ? आज जब चुनाव हो रहा है और आपको वोट चाहिए तब हमारे पास आए हैं। इससे पहले तो आपके दर्शन भी नहीं हुए थे। काफी देर तक हंगामा चलता रहा और सांसद श्री मंडावी को निराश लौटना पड़ा।

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Author: mithlabra