जेल में ही रहेंगे डॉ शिखर गुप्ता, जमानत अर्जी नामंजूर

बालोद । बालोद के हाई प्रोफ ाइल मामले में जेल में बंद डॉ शिखर गुप्ता की परेशानी अभी कम नहीं हुई है। वे अभी जेल में ही रहेंगे। न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया है। माननीय न्यायालय ने इस मामले को बहुत ही गंभीर बताया है।
बहुचर्चित दैहिक शोषण मामला में बालोद स्थित संजीवनी अस्पताल के संचालक डॉ शिखर गुप्ता के मामले में बालोद जिला सत्र न्यायालय ने जमानत अर्जी नामंजूर कर दिया है।अब डॉ शिखर गुप्ता के सामने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जिला न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि आरोपी डॉक्टर है तथा चिकित्सक का दायित्व अपने रोगी को समुचित चिकित्सा देना है, किंतु प्रकरण में संलग्न सभी दस्तावेज ऐसे प्रतीत होते हैं कि आरोपी द्वारा अपने ही मरीज के साथ इलाज के बहाने अकेलेपन का फायदा उठाकर अनाचार किया गया है जो बहुत आपत्तिजनक है। इसी कारण जमानत याचिका खारिज किया जाना उचित होगा। मामले में न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है। न्यायालय ने कहा कि विवेचक द्वारा जल्दबाजी में अनुसंधान पूर्ण कर प्रथम सूचना रिपोर्ट के एक सप्ताह के भीतर धारा 376/2 (ढं) (ड) धारा 354, (ग) के अपराध में विचारण के लिए अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया। सवाल उठाया गया है कि एक सप्ताह के भीतर संपूर्ण दस्तावेज और चालान कैसे प्रस्तुत कर दिया गया।
भाजपा के प्रमुख पद से भी हटाए गए हैं डॉक्टर गुप्ता
ज्ञात हो कि इस मामले में डॉ शिखर गुप्ता को भाजपा के चिकित्सा प्रकोष्ठ के संयोजक पद से भी हटा दिया गया है।मामले को न्यायालय ने 11जनवरी को गंभीर बताते हुए जमानत अर्जी नामंजूर का अपना फैसला सुनाया, लेकिन इससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीर मानते हुए उन पर पद से हटाने की कार्रवाई कर दी थी। डॉ शेखर गुप्ता 3 जनवरी को जमानत याचिका दायर किया था जिसकी सुनवाई 11 जनवरी को हुई। बताया जा रहा है कि डॉक्टर शिखर गुप्ता के सामने अब हाई कोर्ट जाने का विकल्प बचा हुआ है।
लोगों को था इंतजार
ज्ञात हो कि यह मामला काफी हाईप्रोफाइल हो चला था। मामला दर्ज होने के बाद से लेकर अब तक लोगों को आगे की कार्रवाई का इंतजार था। कई लोगों का मानना था कि एक-दो दिन में ही डॉक्टर शिखर गुप्ता को जमानत मिल जाएगी लेकिन पीडि़त पक्ष को आखिर न्याय मिल गया है। डॉ शिखर गुप्ता को जमानत नहीं मिलने से पीडि़त पक्ष को राहत मिल सकती है। फैसला आने के बाद शहर में दिनभर इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म रहा।

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Author: mithlabra

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