डॉक्टर मरीजों की सेवा करने के लिए है आपस मे लड़ाई लड़ने के लिए नहीं – डॉ. नायक

-सिम्स के प्रकरण को आयोग कार्यालय में किया स्थानांतरित, आवेदिका-अनावेदक अपने अपने दस्तावेज लेकर आयोग कार्यालय में होंगे उपस्थित
-सखी सेंटर को आयोग ने 5 प्रकरणों की निगरानी करने दिए निर्देश
बिलासपुर। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती अर्चना उपाध्याय ने आज जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रस्तुत प्रकरणों पर जनसुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ नायक ने अपने कार्यकाल की आज 155 वीं जनसुनवाई की। जिला बिलासपुर की आज 11वीं जनसुनवाई में कुल 30 प्रकरण रखे गये थे। इनमे से 16 प्रकरण नस्तीबद्ध किये गए, शेष प्रकरण को आगामी समय मे सुनवाई की जाएगी।
आज सुनवाई के प्रकरण में आवेदिका के मकान के सामने अनावेदकगण ने अस्थाई होटल बना लिया जबकि वह जगह आवेदिका के नाम पर है। आज आयोग की समझाइश पर अनावेदकगण उस होटल को हटाने के लिए तैयार हुए। आयोग द्वारा एक सप्ताह के अन्दर हटाने के निर्देश दिये गये। यदि अनावेदकगण द्वारा शेड नहीं हटाते है तो आवेदिका के साथ अनावेदकगण के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने में सहयोग करेगी। इस प्रकरण का रिपोर्ट आयोग में प्रस्तुत होने पर इस प्रकरण पर निराकरण किया जायेगा।
एक अन्य प्रकरण में आवेदक मृतका का भाई है उसने बताया कि अनावेदक डॉक्टर के यहां वर्ष 2020 के छठवे माह में मृतका का सोनोग्राफी कराया गया था मृतका के गर्भ मे 2 बच्चे है, ऐसी जानकारी अनावेदक द्वारा दी गई थी। लेकिन बाद में वर्ष 2020 के सातवे माह में पुनः सोनोग्राफी कराने पर पता चला कि मृतका के गर्भ में 03 बच्चे थे। वर्ष 2020 के आठवे माह में मृतका ने 3 बच्चों को जन्म दिया उसके बाद मृतका की मृत्यु 3 दिवस में हो गई। आवेदक का कथन है कि अनावेदक के जांच में लापरवाही से मृतका का उपचार नहीं हो सका इसलिए उसकी मृत्यु हुई। अनावेदक ने स्वीकार किया कि उन्होंने 2 बच्चों का रिपोर्ट दिया था उन्होने बताया कि कई बार ओवरलेप होने के वजह से तीन बच्चा नहीं देख पाये। आयोग द्वारा पुछे गये प्रश्न-गर्भ में 2 भू्रण होने अथवा 03 भू्रण होने से गर्भवती के दवाओं में क्या परिवर्तन होता है? अनोवदक ने बताया कि दवाओं में कोई परिवर्तन नहीं होता है। आयोग ने आवेदक से पूछा कि आपके पास कोई ओपीनियन रिपोर्ट है क्या कि अनावेदक के लापरवाही के वजह से आपकी बहन की मृत्यु हुई है? आवेदक ने उत्तर दिया कि डिलवरी करवाने वाले डाक्टर ने मुझे बताया था कि, यदि पहले से बताया होता कि गर्भ में 03 बच्चे हेै तो दवाईया अलग तरह से दिया जाता। आयोग ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसमें एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह हेतु आयोग कार्यालय रायपुर में स्थानांतरित किया गया है। जहां शासकीय डॉक्टरों से चर्चा कर रिपोर्ट मंगायी जायेगी।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक ने उसके घर का निर्माण कार्य हेतु सौदा कर पूरा पैसा ले लिया और चैखट एवं ग्रील बिना लगाये चला गया। उस काम को करवाने के लिए आवेदिका को 1 लाख 50 हजार रूपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। अनावेदक का कथन है कि आवेदिका ने अतिरिक्त काम करवाया था और उसका पैसा नहीं देने से काम को अधूरा छोड़ना पड़ा। आयोग की समझाइश पर अनावेदक ने अपने व्यय पर सिविल इंजीनियर से नाप कराने की बात कही है। इस प्रस्ताव पर आवेदिका भी सहमत है। आयोग की ओर से इस कार्य हेतु समिति का गठन किया गया जिसमें संरक्षण अधिकारी नवा बिहान, केन्द्र प्रशासक सखी सेन्टर एवं बिलासपुर के जनप्रतिनिधि को कमेटी मेम्बर नियुक्त किया गया। जिस पर कमेटी के सदस्यगण इस प्रकरण पर कार्यवाही कर आयोग को दस्तावेज प्रस्तुत करेगें। जिससे इस प्रकरण का निराकरण किया जायेगा।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके पति ने दूसरी महिला से शादी कर ली है। पति ने घर भी छोड़ दिया है, जिससे उसका पता नही चल रहा है। आवेदिका की 2 साल की बच्ची है। आवेदिका के पास रहने एवं इलाज के खर्च के लिए पैसे नहीं है। आयोग ने आवेदिका को अपने ससुराल में जाकर रहने की सलाह दी है, जिस पर अनावेदकगण भी सहमत है। इस प्रकरण की निगरानी 1 वर्ष तक केन्द्र प्रशासक सखी सेन्टर द्वारा किया जायेगा। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।
एक अन्य प्रकरण में इस प्रकरण में दोनो पक्षों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज है। प्रकरण में कार्यवाही नहीं किया जा सकता इस प्रकरण में आवेदिका कोमा में होने के बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया। प्रकरण को विस्तृत जानकारी के साथ पृथक से आवेदन थाना प्रभारी के विरुद्ध प्रस्तुत करने आवेदिका को समझाईश देते हुए इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका के पति की मृत्यु हो गई है। अनावेदक उनकी सास है। दोनो को समझाईश दिया गया जिससे दोनो साथ रहन के राजी हुए। इसके साथ प्रकरण को 1 वर्ष की निगरानी हेतु केन्द्र प्रशासक सखी सेन्टर सौंपते हुए नस्तीबद्ध किया गया।
सिम्स हॉस्पिटल के प्रकरण में अनावेदक आवेदिका ने बताया गया कि अनावेदक द्वारा न्यूज पेपर में बयान प्रकाशित करवाया गया है कि आवेदिका के पति के खिलाफ जांच चल रहीं है, यहि वजह है कि उनकी पत्नि अर्नगल आरोप लगा रही है। ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके। दोनो पक्षों के बीच विवाद का कारण डेढ़ साल पुराना है। नोटिस से एवं मीडिया रिपोर्ट में की गई शिकायत का पेज ज्यादा है। दोनो पक्षों को समझाईश दी गई है कि क्रमानुसार से दस्तावेज बना कर आयोग कार्यालय में जमा करें। जिससे इस प्रकरण की सुनवाई अलग से तय की जा सके। इस प्रकरण में सुनवाई के लिए कमेटी गठित कर प्रकरण की सम्पूर्ण दस्तावेज को विस्तार से अध्ययन कर इस प्रकरण का निराकरण किया जायेगा।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई, आवेदिका के माता-पिता ने बताया कि आवेदिका ने 18 साल की उम्र में अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर लिया है, और खुद को और अपने ससुराल वालों को बचाने के लिए आयोग के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया है। अनावेदक पक्ष को इस बात की संभावना है कि आवेदिका के ससुराल वाले बच्ची को मानव तस्करी का मामला न बनाये। इस स्तर पर आयोग ने सखी सेन्टर के केन्द्र प्रशासक को निर्देशित किया गया कि इस प्रकरण को प्रतिमाह आवेदिका एवं उसके ससुराल वालों की निगरानी करने के साथ प्रतिमाह आवेदिका को उनके मां-बाप से मिलवायें इस प्रकरण को 01 वर्ष की निगरानी में रखा गया है।

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Author: mithlabra

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